D.N. Jha
Romance
कभी वो याद आएंगे,
नहीं हम भूल पाएंगे।
तुम्हारी याद ही काफी,
नहीं तो जी न पाएंगे।
मुलाकातें नहीं होती,
कभी बातें नहीं होती।
न तो वो याद आती है,
न तो मैं भूल पाता हूं।
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किसान
मैंने तुम्हारे आँखों में उमड़ते हुए प्रेम के अथाह सागर को देखा है. मैंने तुम्हारे आँखों में उमड़ते हुए प्रेम के अथाह सागर को देखा है.
मैं तो जागना चाहता हूँ तुम्हारे साथ रात भर। पर क्या तुम मेरे साथ मेरे सपनों में चलोग मैं तो जागना चाहता हूँ तुम्हारे साथ रात भर। पर क्या तुम मेरे साथ मेरे स...
अगर मुझे हो जाये प्यार तुमसे तो मुझे इतना बता दो , तुम इंकार कैसे करोगी। अगर मुझे हो जाये प्यार तुमसे तो मुझे इतना बता दो , तुम इंकार कैसे करोगी...
दुआ करूंगा मैं तेरे लिए अपने रब से के दुख कोई तुम ऐसा अब पाओगे नहीं दुआ करूंगा मैं तेरे लिए अपने रब से के दुख कोई तुम ऐसा अब पाओगे नहीं
कहीं किसी रोज ,कभी न कभी मेरे उम्मीदों के आंगन में हसरतों के लाल हरे पीले फूलखिलेंगे कहीं किसी रोज ,कभी न कभी मेरे उम्मीदों के आंगन में हसरतों के लाल हरे पीले...
हां ! मुझे कुछ तुमसे है कहना आज तलक जो कहा ना! हां ! मुझे कुछ तुमसे है कहना आज तलक जो कहा ना!
मंजूर नहीं था मुझे बदल जाना। मंजूर नहीं था मुझे बदल जाना।
लाल साड़ी और गहने पहन पूनम का चाँद बन जाऊँगी, आज खुद को मैं ऐसा सजाऊँगी। लाल साड़ी और गहने पहन पूनम का चाँद बन जाऊँगी, आज खुद को मैं ऐसा सजाऊँगी।
एक शीशे की पारदर्शी मछली सी उछलती हुई एक शीशे की पारदर्शी मछली सी उछलती हुई
तू तो हर जगह, हासिल है. तू तो हर जगह, हासिल है.
सारे बंधन संसार के सारे बंधन नातों के मैं छोड़ आई सारे बंधन संसार के सारे बंधन नातों के मैं छोड़ आई
सानिया और अलीशा कजि़न थी और बचपन से बेस्ट फ्रेंड थी. सानिया और अलीशा कजि़न थी और बचपन से बेस्ट फ्रेंड थी.
तुम अपने होंठों से कोई गीत सुनाओ ,नयनों की भाषा से मेरा दिल बहलाओ ! तुम अपने होंठों से कोई गीत सुनाओ ,नयनों की भाषा से मेरा दिल बहलाओ !
हम दोनों नदिया के तीरे मध्य हमारे अविरल धारा। हम दोनों नदिया के तीरे मध्य हमारे अविरल धारा।
आब-ए-चश्म से मिटती नहीं मेरी तिश्नगी, रोज जश्न मनाती है,जख्मों से भरी ये जिंदगी। आब-ए-चश्म से मिटती नहीं मेरी तिश्नगी, रोज जश्न मनाती है,जख्मों से भरी ये जिंद...
मेरे बाद तुम लिखना मेरी कहानी। मेरे बाद तुम लिखना मेरी कहानी।
हमें अपने पवित्र प्रेम को बोलकर मलिन नहीं करना है. हमें अपने पवित्र प्रेम को बोलकर मलिन नहीं करना है.
वह संदर्भ है, मेरी संपूर्ण रचना का। मैं प्रसंग हूं! वह संदर्भ है, मेरी संपूर्ण रचना का। मैं प्रसंग हूं!
आईने में प्रतिबिंब न दिखा। तुम मुझसे समा चुके हो । आईने में प्रतिबिंब न दिखा। तुम मुझसे समा चुके हो ।
तुम्हारे जाने के बाद दरों दीवार सब खामोश से खिसियाते से लगते हैं। तुम्हारे जाने के बाद दरों दीवार सब खामोश से खिसियाते से लगते हैं।