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DR ARUN KUMAR SHASTRI

Romance

4  

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Romance

तेरी याद में

तेरी याद में

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तेरी याद में

मेरी आंखों की चमक

दिन प्रतिदिन

जब तुम मेरे बारे में

सोचती हो

जब तुम मेरी 

तरफ देखती हो

मुझे छूती हो

मेरे व्यक्तित्व को

और मेरा नाम 

पुकारती हो

तब तब तुम

मेरे पास आ जाती हो

मुझे कस के बाजुओं में

अपने दिल की धड्कने सुनाती हो

फिर हमारे हाँथ मिलते हैं , 

शिकायतें करते है फिर 

भूल कर सारे शिकवे 

हम गले मिलते हैं 

एहसास भावो के तब 

बाँध तोड़ कर 

आन्सुओं के रास्ते बह निकलते हैं 

मैं गुद्गुदाता हुँ तुमको 

नही देख सकता 

रोता हुआ , हसाने को 

और तुम गुडि मुड़ी 

सी बच्ची सी 

मेरे बाहु पाश में मचलती हो 

न निकलने की चाहत में 

अनचाही कोशिश करती 

हुए शरमाई सी लजाई सी 

एक टक मेरी आँखो में देखते हुइ

लेकिन प्यार की मादकता से 

गुलाबी गुलाबी मन्द मन्द 

मुस्कुराती हुइ सी 

हम दोनो इन सुन्दर सुन्दर भावों 

से मद् माते हुए 

एक साथ् अचानक 

एक दूसरे से पूंछ बैठते हैं 

क्या हुआ -----ऐसा अकसर होता है 

हम दोनो के साथ् 

जब हम एक साथ् होते हैं 

फिर हमारी हंसी की खुशबु 

फिज़ा में बिखर जाती है 

मैं पागलों सा ढूँढता हुँ 

पर अब तुम कहाँ 

बस मैं और मेरा तकिया 

भीगा भीगा रह जाता है 

रात की तनहाई फिर मुझे 

तेरी याद में रुलाने लगती है। 



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