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Naresh Bokan Gujjar

Romance

4  

Naresh Bokan Gujjar

Romance

तेरी पनाह

तेरी पनाह

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480

ज़िन्दगी जीने की नई र‍ाह मिली है

मेरी ख़्वाहिशों को जब से तेरी पनाह मिली है


प्रेरणाओं का सागर उम्मीदों की झील‌ हो तुम 

तुमसे ही हर हाल में हँसने की अदा मिली है 


अधूरी चाहतों से अब नहीं डरता दिल 

मुझको‌ तेरी मुकम्मल वफा मिली हैं 


किसी दर पर नहीं किए सजदे फिर भी 

तुम मिली हो जैसे बिन मांगे कोई दुआ मिली है


जी करता है कर आऊं शुक्र ख़ुदा का इक बार

उसकी निगाह से ही मुझको तेरी निगाह मिली है


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