एक कविता बहुत कुछ कहती है
एक कविता बहुत कुछ कहती है
1 min
363
कितनी ही ख़ुशियाँ कितने ही ग़म
समेटे रहती है
एक कविता बहुत कुछ कहती है,
किसी की चंचलता, किसी का रूखापन
किसी की नफरत, किसी का प्यार साथ
ले बहती है
एक कविता बहुत कुछ कहती है,
कहीं बारिश, कहीं सूखा
कहीं बहार, कहीं पतझड़
ना जाने कितने ही मौसम जी लेती है
एक कविता बहुत कुछ कहती है,
कभी नदिया, कभी पहाड़
कभी जमीं, कभी आकाश की
बातें करती है
एक कविता बहुत कुछ कहती है,
कौन अमीर, कौन ग़रीब
कौन शैतान, कौन फ़कीर
सबकी खबर रखती है
एक कविता बहुत कुछ कहती है ।
