STORYMIRROR

Sukanta Nayak

Drama

2  

Sukanta Nayak

Drama

तेरी ओर

तेरी ओर

1 min
420

कभी कभी ऐसा लगता है 

कि जैसे भीड़ में भी अकेला है 

और इस अकेलेपन से

कुछ इस तरह रूबरू है, 


कहीं दूर से कोई

पुकारती चली जा रही है 

और बांहें पसारे बुला रही है।


एक पल की दूरी सता रही है 

भ्रम में जीवन जीए जा रहे हैं

हँसते हँसते ग़मों को पीये जा रहे हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama