Sukanta Nayak
Drama
सुबह की पहली किरण जब मुझ पे गिरी,
आँखों में मेरे थोड़ी नमी सी छाई
साँसों में एक ताजगी भर गयी,
और मन में उमंग लाई।
कुछ कर गुजरने का जुनून
आसमानों को छू जाने का जज्बा
हर मुश्किलों को लांघने का साहस
मन में ये सारे आयाम तरंग बनके आए।
आपका साथ
ये खेल नहीं आ...
माता पिता
तेरी ओर
सपना
बीज
बुढ़ापा
उमंग
चुनाव
ख्वाहिश
कठिन है पर असंभव नहीं थोड़ा वक्त लगेगा पर हो जाएगा। कठिन है पर असंभव नहीं थोड़ा वक्त लगेगा पर हो जाएगा।
सुभिक्षा करो इस दुनिया को मासूम बच्चों को सज़ा मत दो ! सुभिक्षा करो इस दुनिया को मासूम बच्चों को सज़ा मत दो !
उपकरण स्वच्छ हस्त स्वच्छ, मन की मति गाती भी स्वच्छ। उपकरण स्वच्छ हस्त स्वच्छ, मन की मति गाती भी स्वच्छ।
कभी कभार भूले भटके ही सही शायद आपको याद आ जाऊँ ! कभी कभार भूले भटके ही सही शायद आपको याद आ जाऊँ !
जब सब कुछ जान कर भी 'मन' अनजान बना रहता है। जब सब कुछ जान कर भी 'मन' अनजान बना रहता है।
पास बुला कर दूर न करना, अब तुम ही मेरे गीत हो गए। पास बुला कर दूर न करना, अब तुम ही मेरे गीत हो गए।
इससे मनुष्य की शारीरिक तथा मानसिक पतन होता है। इससे मनुष्य की शारीरिक तथा मानसिक पतन होता है।
नमन है उन चरणों में ए मां जिसकी धूल मात्र ना बन पाई। नमन है उन चरणों में ए मां जिसकी धूल मात्र ना बन पाई।
तुम्हीं से आस है "नीरज", न घृणा से पा सकोगे उसको। तुम्हीं से आस है "नीरज", न घृणा से पा सकोगे उसको।
तू आप को सक्षम शायर मानता अगर ग़ालिब पढ़ने की तुझे आदत ना होती। तू आप को सक्षम शायर मानता अगर ग़ालिब पढ़ने की तुझे आदत ना होती।
देश का वो था अनमोल दीपक जो बाबा साहब कहलाया था। देश का वो था अनमोल दीपक जो बाबा साहब कहलाया था।
सोच रहा है जग सारा, कोविध मारें कोविद को। सोच रहा है जग सारा, कोविध मारें कोविद को।
कितनी दोंगे सज़ा अब तो दें दो दुआ इंतजार अब है मुझे ऑफिस याद आता है मुझे। कितनी दोंगे सज़ा अब तो दें दो दुआ इंतजार अब है मुझे ऑफिस याद आता है मुझे।
और एक बार फिर समझना ठीक होगा कि वो सब इतना ज़रूरी भी नहीं। और एक बार फिर समझना ठीक होगा कि वो सब इतना ज़रूरी भी नहीं।
इश्क के इस खेल में हारना मंजूर था। इश्क के इस खेल में हारना मंजूर था।
करनी अगर बुरे के बदले में सोचेंगे बुरा तो नकारात्मक ऊर्जा विकसित होगी करनी अगर बुरे के बदले में सोचेंगे बुरा तो नकारात्मक ऊर्जा विकसित होगी
अपेक्षा सभी ह्रदय-पीड़ा की जड़ है---विलियम शेक्सपीयर अपेक्षा सभी ह्रदय-पीड़ा की जड़ है---विलियम शेक्सपीयर
दिन चढ़ गया मेरी मैया,अँधेरा ढल गया मेरी मैया, हो रही मन्दिर में जयजयकार। दिन चढ़ गया मेरी मैया,अँधेरा ढल गया मेरी मैया, हो रही मन्दिर में जयजयकार।
औरत सृष्टि का मूल है, सृष्टि उचित दृष्टिकोण से ही संवारी जाती है। औरत सृष्टि का मूल है, सृष्टि उचित दृष्टिकोण से ही संवारी जाती है।
देश के काम ना आए वो धरती पर है बोझा। देश के काम ना आए वो धरती पर है बोझा।