तेरी ओर
तेरी ओर
जब,जब देखती हूं मैं तेरी ओर
तुझमें खुद ही का अक्स पाती हूं।
तेरे इतने पास होके भी हम दोनो में
इतनी दूरी क्यों नजर आती है?
तू तो कहता है, तू दुआओं में
मुझे ही मांगता है रब से।
अब के से साथ मिलकर दुआ करेंगे
मैं तुझे, तू मुझको, मांग लेंगे हक से।
बिन डोर पतंग जैसे,तेरी ओर खिंची आती हूं,
तेरे प्यार की खुशबू,तनबदन में समाती हूं।
तेरे बिन, साजन!नहीं मेरा कोई अस्तित्व,
कौन पढ़ेगा तुझ बिन मेरा ये कवित्व।
आ चल, दूध में शक्कर पानी से घुल जाएं,
दिया बाती,चंदा की चांदनी से एक हो जाएं।
लाख जतन कर ले ये जालिम दुनिया जुदा करने की
तू मेरा और मैं तेरी,हमेशा के लिए बन जाएं।

