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AMAN SINHA

Romance

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AMAN SINHA

Romance

तेरी मर्ज़ी है

तेरी मर्ज़ी है

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कभी दिलबर बताते हो, कभी रहबर बताते हो

ये मर्ज़ी है बस तेरी, जो मर्ज़ी बताते हो

कभी सुनते हमारी बात, कबसे जो दबी दिल में

हमें अपना बताकर तुम, बड़ा दिल को जलाते हो


जीवन है सफर लंबा, मगर जो तुम हो तो कट जाए

राह है जो सालों की, वो पल भर में सिमट जाए

बिना तेरे ना चल पाएं, कदम दो चार भी हम तो

थाम कर हम तेरा दामन, चलो उस पार हो जाए


तेरी आँखों के ये मोती, नहीं बेकार जाएंगे

रहेंगे दूर हम जितना, उतने हीं पास आएंगे

जतन में छोड़े रखना तुम, बुँदे दो चार खुशियों के

मिलेंगे जब भी हम तुमसे, ये अश्क़ छलक हीं जाएंगे


तेरी परेशानियों का सब, सबब जानता हूँ मैं

तेरे हर ग़म का कारण, खुद हीं को मानता हूँ मैं

ये तेरा हाल जो भी है, सभी क़ुसूर है मेरा

जो तुझको जान ना पाया, ये गलती मानता हूँ मैं


मैं देखूँ तुझे रोता, ये मुझसे हो ना पाएगा

मेरे कारण तेरा जीवन, यूं बिखर ना पाएगा

कैसे छोड़ के जाऊँ, तुझे मैं तेरी हालत पर

है मेरा क्या सिवा तेरे, सभी कुछ छूट जाएगा।


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