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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Romance

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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Romance

तेरी मोहब्बत ।

तेरी मोहब्बत ।

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बादल बरसने लगे हैं, तेरी मोहब्बत है।

हम तो महकने लगे हैं, तेरी मोहब्बत है।।


तू प्यार से गर मिला है।

दिल में मेरे जलजला है।

हम तो मचलने लगे हैं, तेरी मोहब्बत है।।

बादल बरसने लगे हैं, तेरी मोहब्बत है। 


नक्श है , रूप है, ये क्या है ?

रोम रोम में एक नशा है।

हम तो बहकने लगे हैं, तेरी मोहब्बत है।।

बादल बरसने लगे हैं, तेरी मोहब्बत है।


ज्योत है, नेह है और क्या है ?

इस रोशनी पर सब कुछ फना है।

हम तो चमकने लगे हैं, तेरी मोहब्बत है।।

बादल बरसने लगे हैं, तेरी मोहब्बत है।


रीत है, प्रीत है और क्या है?

प्रीत में न कुछ भी ख़ता है।

'सुओम' तो बहलने लगे हैं तेरी मोहब्बत है।।

बादल बरसने लगे हैं , तेरी मोहब्बत है।


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