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तेरी दासी

तेरी दासी

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हाँ मैं तेरी दासी बनकर

तेरे चरणों में रह लूंगी।

तेरे संग काँटों पर चलकर

हर दुख तेरा अपना लूंगी।

क्या सोचता है तु मुझको

नारी कोमल मृदु होती है

हाथ लगाने पर जो नारी

फुलों से मुलायम होती है

पर मैं वो फु ल ही सही

जो कांटो को तेरे ढक दूंगी।

हाँ मैं तेरी दासी बनकर

तेरे चरणों में रह लूंगी।

आँख फे र ना तु मुझसे

तुझसे मेरी हस्ती है

साथ तेरा जो मिले मुझे

देख मेरी क्या चलती है

तेरी राहों में मैं बिछकर

मंजिल तक पहूंचा दूंगी।

हाँ मैं तेरी दासी बनकर

तेरे चरणों में रह लूंगी।

नारी कोमल है जरूर

मगर इतनी कोमल भी नही

वक्त पड़े चट्टान बने

एक जगह पर रहे अड़ी

मुझको अपने साथ में ले ले

तुफानों में काम आऊंगी ।

हाँ मैं तेरी दासी बनकर

तेरे चरणों में रह लूंगी।


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