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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance

तेरे प्यार में ड़ुबा हूँ

तेरे प्यार में ड़ुबा हूँ

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तेरे प्यार में डूबा हूँ मैं , 

चल आ जा दे हाथ ताली।

छुप के खेलना नहीं है मुझे ,

क्यों दूर भाग रही हो रानी।

छवि है तेरी दिल के भीतर में,

क्युं तडपाती हो मेरी प्यारी।

दौडा दौडाकर थकाती हो मुझे ,

अब न बहावो पसीना भारी।

दिल में उठी है प्यार की ज्वाला,

बरसा दो मल्हार से पानी।

तरसता हूँ तेरे पास आने को, 

क्यों करती हे तू मनमानी।

"मुरली" कसम खाता हे तेरी,

दूंगा में हर पल खुशियां सारी।


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