STORYMIRROR

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Romance

4  

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Romance

तेरा मेरा रिश्ता

तेरा मेरा रिश्ता

1 min
415

तुझ से मिला कभी नही

तुझसे गिला कभी नही

तुझे देखता रहा चाहता भी रहा

तेरा हुआ कभी नही

तेरी पसंद का ख्याल था

अपनी पसंद की चाह में

किसी का मैं हुआ नहीं

ये प्यार था कि कुछ और था

ये प्यार था कि कुछ और था

ये तो कभी सोचा ही नहीं।


तुझ से मिला कभी नही

तुझसे गिला कभी नही

तुझे देखता रहा चाहता भी रहा

तेरा हुआ कभी नहीं।


लाखों मिले मिलते रहे

अच्छे भी लगे अच्छे भी थे

बुरा तो सिर्फ मैं ही था

तेरा न जो कभी हो सका

न कह सका न बता सका

तेरी पसंद का ख्याल था

अपनी पसंद की चाह में

किसी का मैं हुआ नहीं

ये प्यार था कि कुछ और था

ये प्यार था कि कुछ और था

ये तो कभी सोचा ही नहीं।


तू ने कभी पूछा नही

मैने कभी कहा नहीं


अपनी अपनी पसंद की बात थी

न कह सका न बता सका

तेरी पसंद का ख्याल था

अपनी पसंद की चाह में

किसी का मैं हुआ नहीं

तुझ से मिला कभी नही

तुझसे गिला कभी नही

तुझे देखता रहा चाहता भी रहा

तेरा हुआ कभी नही

तेरी पसंद का ख्याल था।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance