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सामंत कुमार झा 'साहित्य'

Romance

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सामंत कुमार झा 'साहित्य'

Romance

तेरा मेरा नाम

तेरा मेरा नाम

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तेरे नाम के साथ मेरा नाम हो,

कभी कोई ऐसा भी काम हो।


तेरी सूरत देखें बिन चैन नहीं,

तेरे दीदार से हमें आराम हो।


हम बैठे नदी किनारे बातें करें,

और बस सुनहरी सी शाम हो।


पढ़ चेहरे पर रौनक हो तुम्हारे,

वो मेरा लिखा कोई पैगाम हो।


तुझे प्यार किया मजाक नहीं,

चाहे अब ये बात सरेआम हो।



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