Sandeep Sharma
Horror
जब-जब ओढ़ी तानशाही
तब-तब हुआ है विनाश।
वयं रक्षाम् व...
दीप
सपने
बुजुर्ग
परिश्रम
तानाशाही
ताकत
सरस्वती मंदिर
पर्यटन
प्रेम
अब तो सीधी रोड़ में भी है टक्कर सफर के मुसाफिर। अब तो सीधी रोड़ में भी है टक्कर सफर के मुसाफिर।
कहना है तो बस करना होगा, मन में कोई दुविधा मत रखो। कहना है तो बस करना होगा, मन में कोई दुविधा मत रखो।
ये जिंदगी शायद मैंने पछतावे में गुज़र ली। ये जिंदगी शायद मैंने पछतावे में गुज़र ली।
हार कर अब नियति मान बैठी है इसको अनकहे भावों की दास्तां वही पुरानी है। हार कर अब नियति मान बैठी है इसको अनकहे भावों की दास्तां वही पुरानी है।
दीबा है मेरा नाम मेरे रुप कई हैं हूँ धूप कहीँ और कहीँ सावन की झड़ी हूँ दीबा है मेरा नाम मेरे रुप कई हैं हूँ धूप कहीँ और कहीँ सावन की झड़ी ...
हो जाती है फिर online होने पर तकरार फिर हो जाता है गायब पलभर में Online प्यार...! हो जाती है फिर online होने पर तकरार फिर हो जाता है गायब पलभर में Online प...
कच्ची थी डाल उसको पूछूँ तो वो ही टूट गयीl कच्ची थी डाल उसको पूछूँ तो वो ही टूट गयीl
लेकिन उसका क्या जो आज भी ईंट जुटा रहा है। लेकिन उसका क्या जो आज भी ईंट जुटा रहा है।
इंसानों यह तुम्हारे ही अंदर का एक जानवर है... इंसानों यह तुम्हारे ही अंदर का एक जानवर है...
हो जाए बलात्कार तो लड़की को दोष देते हैं लड़की से ही क्यों 50 सवाल पूछते हैं। हो जाए बलात्कार तो लड़की को दोष देते हैं लड़की से ही क्यों 50 सवाल पूछते हैं...
जिसने इतने जीवन किये बर्बाद हर गर्मी मनहूस आयेगी याद। जिसने इतने जीवन किये बर्बाद हर गर्मी मनहूस आयेगी याद।
अटकी साँस हमारी ऐसे जैसे बचेगी जान नहीं अटकी साँस हमारी ऐसे जैसे बचेगी जान नहीं
नहीं पता कैसे वो माने, यूं देर लगेगी आने में। नहीं पता कैसे वो माने, यूं देर लगेगी आने में।
उसने एक बच्चे को बहलाया-फुसलाया, और एकांत कमरे में जाकर मारकर खाया। उसने एक बच्चे को बहलाया-फुसलाया, और एकांत कमरे में जाकर मारकर खाया।
जिस दिन कलम छूट जाये, लगता हूं जगत बड़ा अनाथ। जिस दिन कलम छूट जाये, लगता हूं जगत बड़ा अनाथ।
जैसे ही कुछ कदम उठाए हम दोनों ने, अचानक एक काली बिल्ली सामने आई। जैसे ही कुछ कदम उठाए हम दोनों ने, अचानक एक काली बिल्ली सामने आई।
बस ये प्रकिया यूँ ही चलती रहेगी इसमें अंकुश नही लग सकता। बस ये प्रकिया यूँ ही चलती रहेगी इसमें अंकुश नही लग सकता।
क्या उसे लिखें क्या उसे कहें जिस ने कर के बे-जान, फिर जान-ए-जाँ भी लिखा है। क्या उसे लिखें क्या उसे कहें जिस ने कर के बे-जान, फिर जान-ए-जाँ भी लिखा है...
विसर्जन के बाद बस कुछ पल मौन ही साथ होता है। विसर्जन के बाद बस कुछ पल मौन ही साथ होता है।
एक सच्चे देशभक्त की, यह सच्ची कहानी है। एक सच्चे देशभक्त की, यह सच्ची कहानी है।