Sandeep Sharma
Horror
जब-जब ओढ़ी तानशाही
तब-तब हुआ है विनाश।
वयं रक्षाम् व...
दीप
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बुजुर्ग
परिश्रम
तानाशाही
ताकत
सरस्वती मंदिर
पर्यटन
प्रेम
अपने प्राणों को समेटे कुछ बूढ़े अपने कभी न लौटने वाले युवा बेटों का इंतजार करते अपने प्राणों को समेटे कुछ बूढ़े अपने कभी न लौटने वाले युवा बेटों का इ...
तुम मुझे याद करना जब तुम तन्हा हो जाओ। तुम मुझे याद करना जब तुम तन्हा हो जाओ।
मिट्टी पे हैं पदचिह्न दिखे कई, पर चलने वाला दिखे नहीं। मिट्टी पे हैं पदचिह्न दिखे कई, पर चलने वाला दिखे नहीं।
नथुनों में दुर्गंध फ़ैली है लहू हर ओर जो बिखरा है नथुनों में दुर्गंध फ़ैली है लहू हर ओर जो बिखरा है
जल, थल, नभ सर्वत्र इंसानी करतब लोभ, लालच में भूल चुका रिश्ते, सब जल, थल, नभ सर्वत्र इंसानी करतब लोभ, लालच में भूल चुका रिश्ते, सब
अपराध और रात का एक अजीब सा नाता है रात का सन्नाटा अपराध की कहानी सुनाता है। अपराध और रात का एक अजीब सा नाता है रात का सन्नाटा अपराध की कहानी सुनाता है।
भैया संग छुपकर, मूवी डरावनी देखी माँ-पापा सो रहे बेखबर निद्रा उन पर हावी थी भैया संग छुपकर, मूवी डरावनी देखी माँ-पापा सो रहे बेखबर निद्रा उन पर ह...
यूँ बड़ी मैं क्यूँ हुई के सब लुटेरे बन गए यूँ बड़ी मैं क्यूँ हुई के सब लुटेरे बन गए
सामने दीवार बनकर हो जाये हम खड़े। सामने दीवार बनकर हो जाये हम खड़े।
कहते हैं अब वो युवक भी उस वीराने का हिस्सा है। कहते हैं अब वो युवक भी उस वीराने का हिस्सा है।
क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है? क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है?
विह्वल सब अश्रु बहाते थे, अपनों की चिता जलाते थे, विह्वल सब अश्रु बहाते थे, अपनों की चिता जलाते थे,
आनंद का उत्सव था, मातम में बदल गया हाथ थामे कौन किसका, हर कोई डर गया। आनंद का उत्सव था, मातम में बदल गया हाथ थामे कौन किसका, हर कोई डर गया।
कभी कभी तो सचमुच में वो हमको बीवी जैसी लगती है। कभी कभी तो सचमुच में वो हमको बीवी जैसी लगती है।
अब वो दिन दूर नहीं जब, देह मेरा लावारिस शव कहलाएगा ।। अब वो दिन दूर नहीं जब, देह मेरा लावारिस शव कहलाएगा ।।
वो तितली पकड़ना फिर सावधानी से छोड़ देना क्या कला थी, पेड़ पर लटकना चढ़ना नदी में नहाना दो वो तितली पकड़ना फिर सावधानी से छोड़ देना क्या कला थी, पेड़ पर लटकना चढ़ना नदी में...
वो उस बियावान को भयाक्रांत कर देती है अपने रुग्ण विलाप से वो उस बियावान को भयाक्रांत कर देती है अपने रुग्ण विलाप से
आज उसके आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है शायद उसे अपना बचपन याद आ रहा है आज उसके आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है शायद उसे अपना बचपन याद आ रहा है
माननीय आविष्कार और मानव की भूल से हुआ हादसा करुण। माननीय आविष्कार और मानव की भूल से हुआ हादसा करुण।
हेलोवीन के नाम से देखो मौत सिखाते हैं बच्चों को ।। हेलोवीन के नाम से देखो मौत सिखाते हैं बच्चों को ।।