STORYMIRROR

Zala Rami

Abstract

3  

Zala Rami

Abstract

स्वतंत्रता

स्वतंत्रता

1 min
18

 

बड़ी शान से मना लिया हमने 

हमारा स्वतंत्रता दिन ।

एक सुर में गुनगुना लिया अपना 

देशभक्ति गान ।

लहरा दिया झंडा देकर बड़ा 

मान -सम्मान ।

इस दिन सोचा कभी हो तुम 

कितना स्वतंत्र?

पा कर आजादी अंग्रेजों से

तुम बन गये स्वतंत्र?

सब बोलते हे ,करें हम अपने मन का।

मन के इस अवगुन से कब छूट 

पाएंगे हम?

अपनों से दूरी बनाकर अपनाने 

चले गैरों को हम!

मोबाईल की इस आदत से

कब छूट पाएंगे हम?

हम आत्माएं राजा,मन होता है 

गुलाम हमारा।

अब गुलाम ने कर दिया राजा पर   वार।

आत्मा बन गया है मन का गुलाम।

अहिंसा को जकड़ लिया हिंसा ने।

महेनत को जकड़ लिया आलस ने।

रमतगमत को जकड़ लिया पब्जी ने।

सादगी को जकड़ लिया ब्यूटी पार्लर ने।

चैन की नींद को भी जकड़ लिया

धन की लालच ने!

इतनी सारी पाबंदी के हम गुलाम।

फिर भी कहे बड़ी शान से हम आजाद ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract