STORYMIRROR

Zala Rami

Abstract

3  

Zala Rami

Abstract

सर्दी की वो शाम

सर्दी की वो शाम

1 min
156

वो शाम जब की मैंने यात्रा 

सर्दी की थी शाम वो।।

बस भी थी तब दो घंटे लेट ।

न ले कर गए थे रजाई।।

मच्छर का बड़ा उपद्रव था।

सर पे बड़ा टेंशन था।।

बस अब तो एक ही था उपाय।

पी स्टेशन पे गर्म गर्म चाय।।

साथ में गर्म गर्म पकोड़ा खाया।

चाय पकोड़े के सहारे ठंड को भगाया।।

एक बात तो यह शाम शिखा कर गई ।

लेनी पड़ेगी ट्रावेल बेग अब नई।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract