STORYMIRROR

Zala Rami

Abstract

2  

Zala Rami

Abstract

वृद्ध

वृद्ध

1 min
182

वृद्ध  है तो बच्चों का जीवन है उपवन।  

वृद्ध आज हैं कल ना होंगे

केसै हैं पूछो।

बैठ के दो घड़ी बात उस के साथ करना।।  

अपने हाथों से उसे खिलाना।  

जीते जी पानी उनको पिलाना।।  

कह के गये शयाने बड़े। 

कहीं बाद में ना पछताना पड़े।। 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract