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Anita Sharma

Tragedy Action Inspirational

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Anita Sharma

Tragedy Action Inspirational

स्वतंत्रता सांस लेने की

स्वतंत्रता सांस लेने की

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जब भी बात की माँ,बहन,बेटी,बीबी की

उन्हे त्याग की मूर्ति बना दिया, 

गढ़ रचनायें महानता की उन्हे देवी बना दिया। 


तुम माँ हो तो त्याग तो करना होगा,

तुम बहन हो अपना हक छोड़ना होगा, 

तुम बीबी हो तुम्हे सब सहना होगा, 

तुम हो बेटी तुम्हे मान रखना होगा। 


दुनिया का हर नियम हम स्त्रियों पर लगा दिया, 

हर रूप हर रिश्ते में बलिदान करवा स्त्री पर

रीति रिवाज परम्पराओं का बोझा धर दिया। 


छीन ली खुलकर सांस लेने की तक स्वतंत्रता, 

महानता के पाठ पढ़ा स्त्री को 

गुलामी की जंजीरों में जकड़ दिया। 


इन जंजीरों में छटपटाती हर स्त्री हुंकार भर रही है, 

पाने को अपने हिस्से की स्वतंत्रता हर लड़ाई लड़ रही है। 

मत बनाओ स्त्री को त्याग बलिदान की मूर्ति, 

ये है एक साधारण इंसान


मूर्ति होती इक पाषाण पर स्त्री है जीती जागती इंसान

ये समझाने की कोशिश कर रही है।


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