स्वतंत्रता का अर्थ
स्वतंत्रता का अर्थ
आज चलूं मैं ले स्वछंद उड़ान,स्वतंत्रता के गीत गाने को।
युगों से जो न कभी मिली,वह स्वन्त्रता आज पाने को।।
बहुत सताया हमे गुलामी ने,अश्रु धार तब बह निकले।
दर्द भरे घावों संग,शूरवीर संग संग फिर चल निकले।।
ले संकल्प आज़ादी का,तन मन सर्वस्व न्योछावर करने को।
आज़ादी के मतवाले वो,चले वसुधा की पीड़ा को हरने को।।
अनगिनत कर शीश बलिदान,माँ के अंक ही सो गए।
दे कर आज़ादी वो हमें,अजर अमर शूरवीर वो हो गए।।
उन्ही शूरवीर के वंशज हम,आज़ादी का अर्थ फिर क्यो भूले।
अधिकारों का कर हनन,क्यो कर्तव्य पथ पर फिर हम न बढे।।
आज कराहती वसुधा देखो,अपनी संतानों के स्वार्थ कर्मो से।
वायु को कर प्रदूषित,मिटाते क्यो सब प्रकृति सुंदरता को।।
आज स्वन्त्रता ऐसी लानी,अंतस जहाँ निश्छल,निर्मल हो।
प्रेम करुणा मन मे बसे,हम सब कर्तव्य पथ के राही हों।।
कर अंतस यात्रा मनुज अब,सद्गुणों का प्रेमी पुजारी हो।
यही स्वन्त्रता हम सब को पाना,स्वयं पर अब नियंत्रण कर।।
देश धर्म,मातृभूमि पर,चले शूरवीर मस्त मस्त चाल अब।
स्वत्रंता को अब पहचान कर,रचना हो हर एका, प्रेम की।।
