सवाल ए नजर।
सवाल ए नजर।
सवाल ए नजर का उसने जवाब भेजा है।
मुझे महकता हुआ एक गुलाब भेजा है।
कदम जमी पर नहीं आज आसमा पर हैं
मेरे ख्वावों का उसने आफताब भेजा है।
इश्क के नूर से ही तो कायनात रौशन है।
झुकी आंखों से उसने ये जवाब भेजा है।
मेरी मंजिल खुद चल के मेरे पास आई।
मेरे नसीब ने मुझ को ये शबाब भेजा है ।
"शिवा"इबादत मेरी रब ने यूं कबूल करी।
इश्क के शाह का मुझको खिताब भेजा है।

