Mayank Kumar
Romance
जब कभी तुम दूर जाना
कुछ संदेशा भेज जाना
पर्वतों सा दर्द में
कुछ खुश हमें भी कर जाना
यादों की वर्षा में,
चार बातें बोल जाना ..
जिंदगी में न सही
पर "कविता" मेरी ले जाना !
तुम एक कलम सी...
उस चाँद का भी...
कुछ खिला चंदा...
पहरेदार
आधी रोटी
मैं भीग रहा ह...
तू कहीं खो गय...
कुछ बातों को ...
मैं तेरे लिए ...
मेरे अंदर वह ...
जाओ घटाओ जाओ जाओ, विरहाग्नि न भड़काओ तुम। जाओ घटाओ जाओ जाओ, विरहाग्नि न भड़काओ तुम।
अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में। अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में।
तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में.. तुम खुशियों के शीशमहल में, तुम मेरी तन्हाई में..
जिसे तुम इश्क कहते हो उसे हम जान कहते हैं। शिद्दत से निभाए कौल को हम ईमान कहते हैं। जिसे तुम इश्क कहते हो उसे हम जान कहते हैं। शिद्दत से निभाए कौल को हम ईमान कहत...
तमस सकल जन हृदय का तुम, प्रिये! हर पल हरती हो। तमस सकल जन हृदय का तुम, प्रिये! हर पल हरती हो।
"फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं। "फूल" के लिए मोगरे के फूल लाया हूं बहारों से चुराकर थोड़ी महक लाया हूं।
हां बहुत बुरे हो तुम कभी भी मुझे बांहों में घेर नहीं कहते हो जान न ही जानू न देते हो गुलाब न ही ... हां बहुत बुरे हो तुम कभी भी मुझे बांहों में घेर नहीं कहते हो जान न ही जानू न...
याद नहीं आ रही अब मुझे रुक्मणी और राधा.. चुंबकीय आकर्षण में तेरे हो गई अधीर और आधा.. याद नहीं आ रही अब मुझे रुक्मणी और राधा.. चुंबकीय आकर्षण में तेरे हो गई अधीर ...
प्रेम का ख़याल, प्रेम से भी बड़ा होता है। प्रेम का ख़याल, प्रेम से भी बड़ा होता है।
बस तुम यूं ही आ जाना...। बस तुम यूं ही आ जाना...।
राधिका रचाए रास कान्हा की याद में, निर्मोही हुए कान्हा सुध भी लेने ना आए। राधिका रचाए रास कान्हा की याद में, निर्मोही हुए कान्हा सुध भी लेने ना आए।
है वह नारी, जो सब पर भारी वो हम सबकी मां है प्यारी।। है वह नारी, जो सब पर भारी वो हम सबकी मां है प्यारी।।
एक गीत अपनी मोहोब्बत के लिए।। एक गीत अपनी मोहोब्बत के लिए।।
मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे। मैं तो अपने को भूल रहा, तुम कर लेती हो याद मुझे।
वेदना अंतस में गहरी फिर भी अश्रु गा रहे हैं। वेदना अंतस में गहरी फिर भी अश्रु गा रहे हैं।
मैं तो अब भी वही हूँ कशमकश भरे कदम रखते हुए, हाथों में मेघदूत पकड़े, भारी पलकों को थामे... मैं तो अब भी वही हूँ कशमकश भरे कदम रखते हुए, हाथों में मेघदूत पकड़े, ...
मैं बन जाती थी आसमान, वो तारा बनकर मुझमें बिखर जाता था... मैं बन जाती थी आसमान, वो तारा बनकर मुझमें बिखर जाता था...
गिनना चाहती हूँ तारों को मैं, चाँद पर बैठना चाहती हूँ, थोड़ी देर... गिनना चाहती हूँ तारों को मैं, चाँद पर बैठना चाहती हूँ, थोड़ी देर...
मैं मचलती हूँ सात सुर-सी बजती वीणा-सी, कोई नश्तर नहीं मेरे वज़ूद के आसपास... मैं मचलती हूँ सात सुर-सी बजती वीणा-सी, कोई नश्तर नहीं मेरे वज़ूद के आसपास...
दिल की अलमारी में मिल गई, अहसासों की पुरानी किताब। दिल की अलमारी में मिल गई, अहसासों की पुरानी किताब।