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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy Inspirational

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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy Inspirational

सत्य स्वीकार का है

सत्य स्वीकार का है

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रुप श्रृंगार का है, झूठ प्यार का है।

हम जानते हैं, सत्य स्वीकार का है॥


सहसा ही जीवन में उथल पुथल हो जाती है ,

जिंदगी अपना ढंग हालात पर बदल जाती है। 


ऐसा नहीं कि अपने वादे से फिर गया हूं,

बस यूं ही कुछ समझ हालात से गिर गया हूं।



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