स्त्री मन और मुस्कान
स्त्री मन और मुस्कान
कहने को बहुत कुछ ,
मगर कह नहीं सकती...!!!??
अपने जज्बात,
अपनी इच्छाएं और बहुत कुछ...!!!!
क्यूं मन किसी बात को ,
लेकर उलझा रहता है..!!!!!!
पूरा दिन बस इसी खयालों में,
बेहतर से बेहतर दिन बनाऊं...!!!!!
सिर्फ अपने लिए ही नहीं ,
अपने अपनों के लिए...!!!!!
सारे गम, सारे दर्द,
सब कुछ समेट कर रख लेती है...!!!!!
अपने हृदय और मस्तिष्क के,
उस कमरे की अलमारी में,
जहां उसकी खुद की नजर भी ना पड़े...!!!!!
मन बहुत करता है कहने को सुनो,
कभी कभी एक टीस भी ,
लहर की तरह उठती है
मगर उठने नहीं देती...!!!!!
एक दर्द होंठों पे दबाए यहीं,
सोचते की कहीं जाहिर ना हो जाए...!!!!!
है न कितनी खूबसूरती से,
सारे दर्द छुपा देती है स्त्री...!!!!!
और चेहरे पे वही मुस्कान
जिसे देख कर मन प्रसन्न हो जाता हैं....!!!!

