स्त्री की योनि
स्त्री की योनि
ढाँप दी जाती है,
एक मिट्टी हुई देह की योनि,
दूसरी मिट्टी से क्योंकि,
वो मृत शरीर है एक स्त्री की योनि।
स्त्री ईश्वर का दिया एक ऐसा उपहार,
जिसकी तमाम उम्र रक्षा की जाती है,
जीते जी तो शायद सबने सुना होगा,
मगर मरने के बाद भी पूजा की जाती है।
आखिर ऐसा क्या है उसकी योनि में,
जो इतना भय रहता है अपने जनों को,
कि मरने के बाद भी कोई छू ना सके,
ऐसा सोच ढाँप देते हैं उसके अंगों को।
कोई कहता कि शमशान ले जाते वक़्त,
चील - कौवे उसकी गंध सूंघ पीछे आ जायें,
तो कोई कहता कि ऊपर मर्दों की आत्मायें,
उसकी योनि के लिए घात लगायें।
इसलिये मृत शव को तैयार करते समय,
ले आते हैं थोड़ी सी बगीचे से मिट्टी,
और उसमे एक रुपये का सिक्का दबाकर,
ढक देते हैं स्त्री की योनि ताकि वो रहे ना चिट्टी।
ऐसे अजीब से रिवाज को देखकर,
मेरे मन में बहुत जोरों का भूचाल आया,
कि कैसा है ये नारी जीवन देखो हमारा,
जहाँ मरने के बाद भी उसे ढाँपने का ख्याल आया।
