सपने
सपने
अच्छे ख्वाब, बुरे सपने, होकर पराये भी
सिमटते हैं अंदर मेरे, जैसे हो अपने मेरे
सपने हमारी ज़िन्दगी की गाथा के
वह बिना पढ़े , छूटे से किस्से होते हैं
जिसे हर पल हमारी रूह मेहनत ,
किस्मत जैसे अनगिनत नगीनों की
स्याही में डूबी कलम से
अनसुलझे धागे में पिरोकर
रंग रही होती है .
