Avinash Mishra
Romance
तू सच थी या कोई सपना।
क्यों नहीं हो सकी अपना।।
क्यों तोड़ दिया हर सपना।
तुझ में ही था जहां अपना।।
हर महफिल में तू थी अपनी।
फिर क्यों छोड़ चली तन्हा।।
जग में किसको कहूं अपना।
अपनों का संग हो गया सपना।।
Avinash
बेटियां अनमोल...
सवालों से घिर...
यूं ही ख्याल ...
सपना या सच
जिंदगी का अहस...
मुझे याद है
मेरे हर ख्याल...
मैं समय हूं
जाना है खाली ...
ठहरा वक्त
तुम मुझसे पूछो हाल मेरा तुम मुझसे बोलो हंसकर जरा। तुम मुझसे पूछो हाल मेरा तुम मुझसे बोलो हंसकर जरा।
उस पर ये यादों की सरगम दिल से उठती देती सदाएं हरदम तुमको पुकार रही है। उस पर ये यादों की सरगम दिल से उठती देती सदाएं हरदम तुमको पुकार रही है।
कशमकश में हूं कैसे खेलूंगा मैं होली तुम्हारे साथ। कशमकश में हूं कैसे खेलूंगा मैं होली तुम्हारे साथ।
बेचैन था इस कदर उस.. महताब की झलक पाने के लिए बेचैन था इस कदर उस.. महताब की झलक पाने के लिए
नश नश में भर दे प्यार बाहों में मुझे जकड़ के। नश नश में भर दे प्यार बाहों में मुझे जकड़ के।
बचे केमिकल रंग से, कर देते बीमार। प्राकृतिक रंग ही सदा,खुशियों का उपहार। बचे केमिकल रंग से, कर देते बीमार। प्राकृतिक रंग ही सदा,खुशियों का उपहार।
मेरी रंग भरी चुनरी में कैद हो जाएगा तू आने वाले हर क्षण, हर साल। मेरी रंग भरी चुनरी में कैद हो जाएगा तू आने वाले हर क्षण, हर साल।
तो आजा खेलें फिर होली एक दूजे को अपना माने। तो आजा खेलें फिर होली एक दूजे को अपना माने।
साल बाद आई हे मिलन का त्यौहार, बरस रहा है बारिस लेके रंगों की झोली। साल बाद आई हे मिलन का त्यौहार, बरस रहा है बारिस लेके रंगों की झोली।
मैं अपनी जिंदगी का एक हिस्सा बना लेता काश ! तुम भी एक खुली किताब होती। मैं अपनी जिंदगी का एक हिस्सा बना लेता काश ! तुम भी एक खुली किताब होती।
तृण तृण में छाई है बहार कण कण में लहराया बसंत।। तृण तृण में छाई है बहार कण कण में लहराया बसंत।।
इश्क को जितना छुपाओ ये उतना मचलता है , ना जाने क्यूँ बार - बार हसरतों का दौर चलता है ? इश्क को जितना छुपाओ ये उतना मचलता है , ना जाने क्यूँ बार - बार हसरतों का दौर चल...
होली के पावन पर्व पर हम, मिलकर रास रचाए। होली के पावन पर्व पर हम, मिलकर रास रचाए।
तेरे मेरे इश्क़ के चर्चे अब अफ़साने हो गए। तेरे मेरे इश्क़ के चर्चे अब अफ़साने हो गए।
तेरे तस्वीर का क्या करूँगा, रोज ख्वाबों में आती हो तू। तेरे तस्वीर का क्या करूँगा, रोज ख्वाबों में आती हो तू।
मैं रूठा हूँ अगर तुम भी रूठ गए तो फिर दोनों में से एक दूसरे को मनाएगा कौन ? मैं रूठा हूँ अगर तुम भी रूठ गए तो फिर दोनों में से एक दूसरे को मनाएगा कौन ?
जिंदगी जीने की एक ललक एक प्यार के लिए तरस जायेे। जिंदगी जीने की एक ललक एक प्यार के लिए तरस जायेे।
थी वो एक प्यारी सी लड़की , जिसका मैं दीवाना था । थी वो एक प्यारी सी लड़की , जिसका मैं दीवाना था ।
बैठ जाती हो मेरी पलकों की मुंडेर पर और झाँकती हो मेरी आँखें में ! बैठ जाती हो मेरी पलकों की मुंडेर पर और झाँकती हो मेरी आँखें में !
झांकूँ जो दर्पण में, तो दिखता है एक अक्स जानती हूँ , मैं ही हूँ, पर पहचान नहीं पाती। झांकूँ जो दर्पण में, तो दिखता है एक अक्स जानती हूँ , मैं ही हूँ, पर पहचान नह...