STORYMIRROR

Avinash Mishra

Romance

2  

Avinash Mishra

Romance

सपना या सच

सपना या सच

1 min
222

तू सच थी या कोई सपना।

क्यों नहीं हो सकी अपना।।

क्यों तोड़ दिया हर सपना।

तुझ में ही था जहां अपना।।

हर महफिल में तू थी अपनी।

फिर क्यों छोड़ चली तन्हा।।

जग में किसको कहूं अपना।

अपनों का संग हो गया सपना।।

Avinash


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance