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Avinash Mishra

Abstract


2.0  

Avinash Mishra

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जाना है खाली हाथ

जाना है खाली हाथ

1 min 238 1 min 238

बंद मुट्ठी है आना, खाली हाथ है जाना

फिर क्यों लिख रहे हो झूठ का फसाना।


हर युग कहता है गाओ सच का तराना

फरेब में जो माहिर, गाते सब वही गाना।


पिसती जिंदगानी, चलती जुल्म की मनमानी

ताकत सब पर भारी, हर तरफ यही कहानी।


फिर भी कहता हूँ, बात सबने है यह मानी

पाप को हर युग में, सच से मुंह की खानी।


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