दिनेश तिवारी(भोजपुरिया)
Action
अगर तुमको सचमुच
ही पानी है
संयम की परिभाषा
तो बोलनी होगी
नारी के संग
नारीकी समझ की
भाषा
तुम पुरुष हो तो
यह मत भूलो कि
विश्वामित्र भी पुरुष थे
मेनका ने तोड़ी थी
उनकी मौन भाषा
यह एक तपस्या ही है
कि तुम्हारे सामने प्रकृति
रहे
और तुम पुरुष न रहो।
एकता
बाढ़ में
संयम
सफर
भीड़
हृदय
जीवन संघर्ष
जंगल
मजदूर !
हमारे माता-पिता भी, और हम भी ईमानदार, माता पिता से सीखा, हर नारी देवी के समान। हमारे माता-पिता भी, और हम भी ईमानदार, माता पिता से सीखा, हर नारी देवी के समा...
प्रत्येक रूप में तुम्हारी महिमा का... मैं भक्ति पूर्वक गुणगान करूं. प्रत्येक रूप में तुम्हारी महिमा का... मैं भक्ति पूर्वक गुणगान करूं.
उठो उठो यह वादियां बुला रही है तुम्हें। दुनिया के यह किस्से तो दुनिया में ही रह जाएंगे उठो उठो यह वादियां बुला रही है तुम्हें। दुनिया के यह किस्से तो दुनिया में ही ...
मेहनतकश लोगों की कभी हार नहीं होती। किसी की मेहनत कभी भी बेकार नहीं होती ।। मेहनतकश लोगों की कभी हार नहीं होती। किसी की मेहनत कभी भी बेकार नहीं होती ।।
दो दोस्तों से बात हुई जान ख़ुश ये दिल मेरा, एक से लड़े, बात हुई बंद तो टूटे दिल मेरा। दो दोस्तों से बात हुई जान ख़ुश ये दिल मेरा, एक से लड़े, बात हुई बंद तो टूटे द...
एक दिन उनका अंत हुआ, खाते रहे मलाई, नाम कमाया जगत में, उसने ही पुण्य कमाई।। एक दिन उनका अंत हुआ, खाते रहे मलाई, नाम कमाया जगत में, उसने ही पुण्य कमाई।।
शायद बना दिए थे हमने, कुछ अंतर ऐसे भी, जिससे जीवन की कुछ भोर ऐसी हुई, शायद बना दिए थे हमने, कुछ अंतर ऐसे भी, जिससे जीवन की कुछ भोर ऐसी हुई,
तूफान अधिक हो अगर कश्तियाँ अक्सर डूब जाती है तूफान अधिक हो अगर कश्तियाँ अक्सर डूब जाती है
कभी धरती मां के आंचल में लिपट, सारा दिन गुज़ारे, कभी धरती मां के आंचल में लिपट, सारा दिन गुज़ारे,
लिखने बोलने से भी ज्यादा, भाषा को जीना सीखना है।। लिखने बोलने से भी ज्यादा, भाषा को जीना सीखना है।।
पानी भी प्रदूषित कर दोगे तो एक बार तो सोचो भला फिर तुम कैसे जी पाओगे? पानी भी प्रदूषित कर दोगे तो एक बार तो सोचो भला फिर तुम कैसे जी पाओगे?
नफ़रत और घृणा किसी से ना करना सिखाता है, नफ़रत और घृणा किसी से ना करना सिखाता है,
परीक्षाएं आती जाती रहतीं, नहीं जीवन में इनका अभाव। परीक्षाएं आती जाती रहतीं, नहीं जीवन में इनका अभाव।
फिर उत्पन्न हुए अस्थिर विचार और भाव फिर उत्पन्न हुए अस्थिर विचार और भाव
इस देश में जनता-जनार्दन को तवज्जोह मिलती है... इस देश में जनता-जनार्दन को तवज्जोह मिलती है...
एक बूढ़ा पेड़ जो जागता, रोता रहा, रात - रात भर। एक बूढ़ा पेड़ जो जागता, रोता रहा, रात - रात भर।
अनेकता में एकता, यहीं राष्ट्र की पहचान है, संस्कृति से सुसज्जित, कलाकृतियों से सम्मान अनेकता में एकता, यहीं राष्ट्र की पहचान है, संस्कृति से सुसज्जित, कलाकृतियों स...
चलो बेटा, जीत तुम्हारी है, क्योंकि, संघर्षों की हर कहानी बहुत प्यारी है।। चलो बेटा, जीत तुम्हारी है, क्योंकि, संघर्षों की हर कहानी बहुत प्यारी...
संसार यह मेरे लिए था नया धर्म यहां कर्म से था बंधा। संसार यह मेरे लिए था नया धर्म यहां कर्म से था बंधा।
हम तो वफ़ा ही करते गये, अपनी वादे सारे निभाते गये, हम तो वफ़ा ही करते गये, अपनी वादे सारे निभाते गये,