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दिनेश तिवारी(भोजपुरिया)

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दिनेश तिवारी(भोजपुरिया)

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जंगल

जंगल

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 एक जंगल है मैं आपको

 दिखाऊं, समझाऊं

 जहां पर पेड़ नहीं, पंछी नहीं,

 झरने नहीं, नदियां नहीं

 जीव जंतु भी नहीं जो स्वतंत्र   

 हो, विचरणशील हो

 बचपन की उन कहानियों

 की तरह जो चंपक में 

 छपती थी, कुछ वैसा

यह वो जंगल है- जो  उगता है जमीन पर ही,

छड़, गिट्टी, सीमेंट से,

मकान बनकर धीरे- ,धीरे

 यहां भी रहते हैं पालतू कुत्ते,पिजड़ों में पंछी

 उगाए जाते हैं कैक्टस के बाग

बनाये जाते हैं स्विमिंग पुल आदि।

 सजाये जाते हैं वन्य जन्तुओ के खाल व पोस्टर

बस यहां शिकार का अंतर है

  वहां शेर आदमी को खाता  है,

  यहां आदमी को आदमी।।


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