स्नेह सभी को देना है
स्नेह सभी को देना है
शालीनता, माधुर्यता के परिधियों में बातें अच्छी लगतीं हैं !
संवाद टिप्पणिओं की भाषाएँ सबके हृदय में बस जातीं हैं।
गर्म हवाओं के झोंकों से विचलितमन करने लगता है !
फिर सावन की शीतल फुहार से मन मुदित हो जाता है।
वारिस की बूंदों के छींटे सब जगह एक बराबर पड़ते हैं !
सबको शीतलता से सिंचित करके दुःख सबके वे हरते हैं।
हम अपनी बातों से लोगों के दिल में अपना स्थान बनाते हैं !
भाषा विकृतिओं से लोगों को क्षण में आहत कर जाते हैं।
श्रेष्ठों को सम्मान चाहिए अभिनन्दन का पूरा एहसास चाहिए !
समतुल्यों को सम्बोधन में आभार और छोटों को भी प्यार चाहिए।
