STORYMIRROR

Shagun Dipchand Nirmal

Abstract Classics Inspirational

4.5  

Shagun Dipchand Nirmal

Abstract Classics Inspirational

समय

समय

1 min
8

समय-समय की यह है बात,
यह रुकता नहीं किसी के घाट।
पल भर में दास बने नवाब,
पल भर में यह बने ख्वाब॥

यूँ तो तीव्रता इसकी
हरदम समान;
कुछ जन के लिए यह
थम सा जाए,
कुछ के लिए यह
दौड़ लगाए॥

कुछ के लिए यह इतना ज़्यादा,
करता है वह इसे बर्बाद।
कुछ के लिए यह इतना कम,
कि वो रोएँ इसके नाम॥

इसने रानी को
महारानी बनाया,
महारानी को दासी भी
यह बना बैठा॥

अपनी अनदेखी ताकत
से वह सबको
हराता चला गया।
अनाड़ी को बनाया खिलाड़ी,
पर खिलाड़ी भी न
जीत सका इसका खेल॥

इसकी तीव्रता देखकर,
वैज्ञानिक भी गए हार।
इसकी चतुराई से हो गए
वो भी परेशान॥
इससे न जीत पाए
बलवान,
न पा सका कोई
इसका पूरा ज्ञान॥

भूत, वर्तमान और भविष्य
का यह है जोड़।
कोई नहीं है ढूँढ पाया
इस पहेली का तोड़॥

घड़ी की टिक-टिक में,
जीवन की कर्कशता में,
और
वक्त के पहिए में,
मानव ऐसे फँस जाता है
कि कब मौका चला
गया, वह जान भी
नहीं पाता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract