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Shagun Writings

Classics Inspirational Others

4.7  

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जो तू पीछे छोड़ आया

जो तू पीछे छोड़ आया

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जो तू पीछे छोड़ आया,
क्या वो अब भी है वैसा
जैसा उसे ओझल किया था तूने॥

तेरे छोड़ जाने से क्या
रुक गया समय वहाँ?
या लोगों ने हँसना छोड़ा,
या समय ने थमना सीखा? 

आखिर तू ही बता,
क्या तेरे सब छोड़ आने से
कुछ बदल गया?

फिर क्यों बैठा है तू निराशा में,
क्यों दिल में एक गूँज है—
"तू वापस चला जा!" 
क्यों उस धरती से जुदा होकर
तू फिराक की आग में जलता है? 
क्यों तुझे तेरा अतीत इतना याद
आता है?

आज धूप में छाँव है,
कल छाँव में धूप।
पल भर में तो जग बदले है
तो काहे न बदले जन।

तू जो वापस चला गया,
तो भी कुछ न वैसा होगा,
जैसा तूने सोचा होगा।
बदले हुए इंसान होंगे,
बदला हुआ संसार होगा।
तेरी कल्पना सिर्फ
तेरा एक ख्वाब रहेगा।

वर्तमान में रहना तुझे अब सीखना पड़ेगा।
अतीत को भुलाकर तुझे अब
रणनीतिक दूरदर्शिता के साथ
सफलता का नया अध्याय लिखना पड़ेगा।


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