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Shagun Dipchand Nirmal

Classics Inspirational Children

4.7  

Shagun Dipchand Nirmal

Classics Inspirational Children

मदद

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भय से आँखें चार कर
मैं भय के भय से भर गया;
कोई न था साथ तब,
पास खड़ा था जग सारा।।

पुकार सुनकर भी न आया कोई,
तब लगा यह संसार भरा हुआ है
ऐसे अपंगों से —
जिनमें न दिल है, न हमदर्दी;
जिन्होंने मनुष्यता का खूनकर दिया है।।

'मनुष्यता', यह शब्द सुनते ही
जो देते थे अपनी मिसाल,
आज ज़रूरत पड़ने पर,
उनकी मिसालें बुझ गईं।।

तब अक्ल यह आई कि —
कोई न है किसी का सहायक,
खुद की सुरक्षा खुद के ज़िम्मे है।
अपना सहायक अपने भीतर
ढूँढना पड़ेगा।।

तेरी ज़रूरत बस तुझको है,
करेगा न कोई तेरा उद्धार।
तुझको उड़ता देख कर,
लोग चाहेंगे कतरने तेरे पर।।

रास्ते मुश्किल होंगे,
पर तू रुकना नहीं,
दुनिया झुकाना चाहेगी,
पर तू झुकना नहीं।
मुश्किलों की चट्टान होगी बहुत बड़ी,
पर तू डरना नहीं।
तूफ़ान कितने भी आएं,
पर तू पर्वतराज सा अडिग खड़ा रह।।


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