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Shagun Dipchand Nirmal

Abstract Classics Inspirational

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Shagun Dipchand Nirmal

Abstract Classics Inspirational

मन मलिक

मन मलिक

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चारों ओर अंधियारा है,
कोई न किसी का सहारा है।
बस मन में एक जोत है,
वही तेरे लिए बहुत है।।

बाहर सात समुद्र हैं,
मन में एक संकोच है।
बस उसे मिटा दे,
फिर सात हजार समुद्र भी
 तू पार कर सकता है।।

बाहर खड़ा गिरिराज है,
भीतर एक अचरज है।
बस उसे लाँघ जा,
फिर हिमालय क्या चीज़ है।।

रास्ते में चट्टान है,
मन में कँकरिया ख़्वाब है।
तू उसे फेंक दे,
चट्टान भी हट जाएगी।।

अपने मन का मालिक बन,
तू खुद ही खुद का स्वामी बन ।।

ब्रह्मांड तेरी सीमा है,
बहाना तुझे -
अश्रु, रक्त और पसीना है।
खुद के दीपक से तुझे
संसार प्रकाशित करना है;
लोग मिसाल दें
कुछ ऐसा कर दिखाना है।।

मन के माने हार है,
मन के माने जीत।
यह सब कुछ निर्भर करता है,
कि कैसी है तेरी दृष्टि-रीत।।

जैसा तेरा मन चाहेगा,
वैसा ही घटित होगा।
यह जगत का अविकारी नियम है,
जिसे कोई न बदल सकेगा।।

सफलता मेहनत माँगती है,
बस तू मेहनत से ना डरना।
अपनी जी-तोड़ लगन से,
तू मन को सच साबित करना।


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