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Shagun Dipchand Nirmal

Inspirational Others Children

4.7  

Shagun Dipchand Nirmal

Inspirational Others Children

वह डरता है

वह डरता है

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वह बोलना चाहता है,
पर लोग क्या सोचेंगे,
इस बात से डरता है।
वह अपनी वाणी से
सबको वश में कर सकता है,
परंतु समाज की दकियानूसी सोच
उसे डराती है।

अपने कदमों से वह
वारिधि भी लांघ सकता है,
परंतु लहरों से उसका मन
डर जाता है।
वह चाहे तो महीधर को भी
तोड़ सकता है;
मंज़िल मेहनत माँगती है,
परंतु वह मेहनत से ही डरता है।
नींद से गहरी दोस्ती करके
वह पलंग नहीं छोड़ता है;
"वक्त नहीं है" कह-कहकर
वह वक्त बर्बाद करता है।

वह समाज सुधारक बनना
चाहता है, परंतु
इतिहास के किस्सों से वह डरता है। ।

वह दूसरों में कमियाँ खोजता है,
परंतु स्वयं को निर्मल समझता है ।।

वह खुद को बदलना चाहता है,
परंतु बदलाव उसे डराता है।।

हार के डर से वह
मैदान में भी नहीं उतरता है;
अपनी कमियों का वह
निर्माता बनता है ।।

वह आकाश चूमना चाहता है,
परंतु पर खोलने से उसे डर लगता है। ।

अपने डर को वह हराना चाहता है,
परंतु डर का डर ही उसे
डरा देता है। ।

वह आगे बढ़ना चाहता है
परंतु वह परिश्रम से भी
इतना डरता है कि
वह प्रयास करने का
प्रयास भी नहीं करता है ।।


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