समय का प्रवाह
समय का प्रवाह
समय का प्रवाह कभी रुकता नहीं,
जो चलते हैं इसके सहचर बने,
पाते मंजिल वही मनचाही हुई,
समय बलवान है निर्बल भी है,
समय रुकता नहीं,
एक क्षण के लिए,
अपनी धुरी पर,
जब चलता समय,
सब कहते समय बहुत बलवान है,
धुरी से जब फिसले,
समय की गति,
लोग कहते समय अब निर्बल हुआ,
जो समय की धारा के,
अनुरूप चलते गए,
जीवन का दर्शन समझने लगे,
कुछ ऐसे दीवाने हुए हैं यहां,
जिसने मोड़ा समय को,
उसको रोका भी है,
क्षण भर के लिए समय,
रूक भी गया,
नतमस्तक हुआ फिर आगे बढ़ा,
एक जैसा समय,
कभी रहता नहीं,
कभी राजा करे,
रंक करता कभी,
कभी राजा यहां,
डोम बनकर रहे ,
ईश्वर भी वन वन फिरते रहे,
समय जैसा गुरु,
यहां कोई नहीं,
जिसने समय का आदर दिया,
बुलंदी ने उसका स्वागत किया,
समय कैसा भी हो,
उसका सम्मान हो,
समय मिलने दोबारा आता नहीं ।।
