STORYMIRROR

Govindprasad Oza

Romance

4  

Govindprasad Oza

Romance

सखी

सखी

1 min
12

सखी……

रिमझिम बारिश के फुहारों में

आँखों की गहरी तपिश लिए

बंधे मौसम की आवाजों में

बिजलियों की हमसाये में

मुझ में अपना सावन उतार दो.....


सखी……

उम्मीदों और हवाओं में

मुक्त आनंदित स्पर्श लिए

मिलन की अतृप्त छाया में

सौंदर्य के बोध में

मुझ में अपना सावन उतार दो.....


सखी……

मेघ मल्हार के विरह में

पहले बरसाती बूंदें लिए

फूलो से भरे अम्बर में

तुझसे मिले जीवन में

मुझ में अपना सावन उतार दो.....


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance