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Govindprasad Oza

Drama

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Govindprasad Oza

Drama

सफ़र

सफ़र

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अपना ही

अंतिम सफर महसूस किया है

एक और जन्म की दौड़ में


पर

विलक्षण

मेरी आत्मा

विनम्र और सर्वशक्तिमान

अपने स्थिर द्वार पर

मौन !


विवादित आस्थाएँ

किसी की इच्छा के बिना

छूटती जाती हैं

सुलझती हैं

सिर्फ


ज़िन्दगी की

तपती दोपहर में

सहेजा हुआ

मौन !



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