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Dr pratap Mohan Bhartiya Bhartiya

Tragedy

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Dr pratap Mohan Bhartiya Bhartiya

Tragedy

सिसकी

सिसकी

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जब मन की पीड़ा 

आंसू बन कर 

गालों पर आती है 

यही सिसकी

 कहलाती है


सिसकते है हम 

बिछड़े प्रियतम की यादों में 

खो जाते हैं हम याद कर 

उनकी बातों में 


आंसू सिसकी की 

शान बढ़ाते हैं 

बिना रुके 

गिरते जाते हैं


कुदरत के आगे 

नही चलती किसकी 

दुखी आत्मा की आवाज 

होती है सिसकी


कौन याद करता है

ये हिचकियां 

बयां करती है 

और हमारे दिल का दर्द 

ये सिसकियां 

बयां करती है 


जीभर के रोओ 

मत सिसका करो 

किसी बेवफा की याद में 

यूं न तड़पा करो 


सिसकियों में हम 

अपने ग़म पीते हैं 

मन मारकर 

जीते हैं।


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