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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Fantasy

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

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शरद ऋतु

शरद ऋतु

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अति मोहक शरद ऋतु आई, 

फूले हुए काँस से अवनी छाई,

पतझड़ का आरंभ करती हुई,

नवरंग पौधे की सुंदरता लाई।


श्वेत फूलो की मधुर महक लाई,

राजहंस की सुरीली आवाज लाई,

श्वेत वस्त्रों का सिंगार सजकर, 

अमृत वर्षिणी सुंदर चांदनी लाई।


त्योहारों का मन में उल्हास लाई,

तन और मन की स्वस्थता लाई,

सुंदर फसलों की बौछार के संग,

आनंद और मंगल की गुंजन लाई।


"मुरली" मधुर श्याम सुंदर ने बजाई,

गोपीयाँ दौड़कर यमुना तट पे आई,

महारास का परम आनंद देनेवाली,

छूम छननन करती शरद ऋतु आई।



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