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V. Aaradhyaa

Romance Classics Fantasy

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V. Aaradhyaa

Romance Classics Fantasy

रतजगा सा है

रतजगा सा है

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जीवन संघर्ष किसी तपस्या की तरह ही है,

अनवरत मेहनत के बाद ही कहीं जाकर

मनवांछित अपनी सफलता मिल पाती है !

और इस क्रम में बहुत सारे सुखों और

खुशियों का त्याग करना ही पड़ता है !


कई बार सारी रात जागना पड़ता है,

जीवन एक लंबा रतजगा सा लगता है।

तो कभी भूखे पेट भी सोना पड़ता है !

बहुधा अपने रूठकर चले जाते हैं,

तो कभी कभी दोस्त भी रूठ जाते हैं !


अमोद प्रमोद व धनलोलुप बिछड़ जाते हैं,

जो सच्चे साथी हों वो ही साथ रह जाते हैं !

मन की शांति व प्रियजनों के प्रेम का मोल है,

इस तपस्या के पश्चात प्राप्त सुख अनमोल है !


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