रतजगा सा है
रतजगा सा है
जीवन संघर्ष किसी तपस्या की तरह ही है,
अनवरत मेहनत के बाद ही कहीं जाकर
मनवांछित अपनी सफलता मिल पाती है !
और इस क्रम में बहुत सारे सुखों और
खुशियों का त्याग करना ही पड़ता है !
कई बार सारी रात जागना पड़ता है,
जीवन एक लंबा रतजगा सा लगता है।
तो कभी भूखे पेट भी सोना पड़ता है !
बहुधा अपने रूठकर चले जाते हैं,
तो कभी कभी दोस्त भी रूठ जाते हैं !
अमोद प्रमोद व धनलोलुप बिछड़ जाते हैं,
जो सच्चे साथी हों वो ही साथ रह जाते हैं !
मन की शांति व प्रियजनों के प्रेम का मोल है,
इस तपस्या के पश्चात प्राप्त सुख अनमोल है !

