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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Fantasy

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Fantasy

लॉकेट

लॉकेट

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आज राधा जी बेचैन हैं 

फूटें मुख से ना कोई बैन हैं 

सूज गई रो रोकर अंखियां 

व्याकुल हो रही सारी सखियां 


ढूंढें ललिता ढूंढें विशाखा 

छान मारा सबहीं तो इलाका 

निधि वन में कल रास रचायौ 

श्याम ने खुद लॉकेट पहनायौ 


आज न जाने कहां गिर गयौ बैरी 

घर जाइबे कूं है रही है देरी 

"बा लॉकेट मोहे जान ते प्यारौ 

श्याम ने खुद मेरे गले में डारौ" 


राधा रोवै सुबक सुबक कर 

धीर धरै ना केहि बिधि कर कर 

देखि न जाय प्रिया की हालत 

प्रभु पै टूटी ये कैसी आफत 


"त्रिभुवन तुझपे वार दिया है 

इतना तुझको प्यार किया है 

इक लॉकेट के लिए क्या रोना 

प्रेम से बढ़कर है क्या सोना ? 


छोड़ त्रिया हठ मौज मनाओ 

झूमो नाचो रास रचाओ।  

प्रेम है दुनिया में अनमोल 

लॉकेट का है क्या कोई मोल" ? 

तब राधा रानी हरषाईं 

रास रचाने कूं उठ धाई।। 


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