STORYMIRROR

Monika Sharma "mann"

Tragedy

3  

Monika Sharma "mann"

Tragedy

शहरों में है छाया सन्नाटा

शहरों में है छाया सन्नाटा

1 min
357

शहरों में सन्नाटा गहरा हो गया 

गरीब अब बेरोजगार हो गया  

चल दिया गांँव की ओर  

पैसा ही सब कुछ हो गया 

शहरों में सन्नाटा गहरा हो गया।। 


सोच कर आए थे पैसे कमाएंँगे 

बूढ़े मांँ-बाप का कर्जा चुकाएंँगे 

आतंक यह कैसा हो गया 

शहरों में सन्नाटा गहरा हो गया ।।


ऊंँची ऊंँची इमारतों में अब कुछ ना रह गया

अपना साया भी अपना ना रह गया 

शहरों में सन्नाटा गहरा हो गया 

तिल तिल कर गुजर रही थी जिंदगी

अब मौत का पहरा हो गया 

शहरों में सन्नाटा गहरा हो गया।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy