शहरों में है छाया सन्नाटा
शहरों में है छाया सन्नाटा
शहरों में सन्नाटा गहरा हो गया
गरीब अब बेरोजगार हो गया
चल दिया गांँव की ओर
पैसा ही सब कुछ हो गया
शहरों में सन्नाटा गहरा हो गया।।
सोच कर आए थे पैसे कमाएंँगे
बूढ़े मांँ-बाप का कर्जा चुकाएंँगे
आतंक यह कैसा हो गया
शहरों में सन्नाटा गहरा हो गया ।।
ऊंँची ऊंँची इमारतों में अब कुछ ना रह गया
अपना साया भी अपना ना रह गया
शहरों में सन्नाटा गहरा हो गया
तिल तिल कर गुजर रही थी जिंदगी
अब मौत का पहरा हो गया
शहरों में सन्नाटा गहरा हो गया।।
