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Amit Kumar

Abstract Romance Inspirational

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Amit Kumar

Abstract Romance Inspirational

शबनमी

शबनमी

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दर्द बहुत होता है

जब भी उसकी 

आंखें नम देखता हूँ

कोसता हूँ खुद को

जब भी उसको

किसी और के 

लिए तंग देखता हूँ

वो आईना है मेरा

जिसमें आजकल मैं

अपना अक़्स देखता हूँ

कुछ नहीं बन पाया

मेरे उसके बीच में

शायद इसीलिए उसको

अपने साथ मैं

कम देखता हूँ

लोग भी अपने है

जो मज़ाक उड़ाते है

लोग भी अपने ही है

जिनको उसके संग देखता हूँ

तरन्नुम की समझ उसको कहाँ

जिसमें मैं अपनी ग़ज़ल देखता हूँ

वो भी तनिक आशक्त हो

कभी किसी रोज़ मुझपर

यही सोचकर मैं उसके दिल पर

अपने दिल की पतंग फेंकता हूँ

इश्क़ दुश्वार तो कर रहा है

जीना मेरा उसके बग़ैर

उसकी आँखों में भी आजकल मैं

अपने लिए इश्क़ की चन्द शबनम देखता हूँ .....

                   


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