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Sangeeta Ashok Kothari

Abstract

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Sangeeta Ashok Kothari

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शब्दों के जादूगर

शब्दों के जादूगर

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प्रेमचंद, दिनकर, महादेवी, हरिवंश राय आदि कई जेहन में आते हैं 

आज भी जब हम साहित्य का इतिहास उठाकर देखते हैं,

और भी अनेकों हुए जो लेखनी की छाप छोड़ गये हैं।


ये शब्दों के जादूगर भावनाओं का जादू दिखाते हैं,

लेखनी से कभी आँखों में आँसू देते तो

कभी उद्विग्न करते हैं,

शब्दों का स्वप्निल जाल बुन हमें उसमें जकड़ लेते हैं।


शब्दों को पकड़ एक तिलस्मी दुनिया का निर्माण करते हैं,

जिसमें हम सुधबुध खोकर आगामी पन्ने पलटते रहते हैं,

लेखनी की प्रक्रिया में मन और मस्तिष्क दोनों सक्रिय रहते हैं।।


शब्दों के जादूगरों की श्रेणी में नेता अभिनेता भी आते हैं,

फ़र्क इतना की वो औरों का लिखा हुआ बोलते हैं,

शब्दों की चयन प्रणाली के मायने रखती जादू बिखेरने में।।


शब्दों का जादू हथौड़ा बन मस्तिष्क में प्रहार भी करते हैं,

रिश्तों में खटास और कड़वाहट का बीज भी बो देते हैं,

और कई बार मिठास घोलकर रिश्तों को प्रगाढ़ कर देते हैं।



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