शायद
शायद
शायद तुझसे मुलाकात ना होता
तो अच्छा होता,
शायद तू उन दिन मेरी तरफ
ना देखता तो अच्छा होता,
शायद तू मुझे देख कर
हल्का मुस्कुराना ना देता
तो अच्छा होता,
शायद तू तेरा आंखो से
मुझे इशारा ना किया होता
तो अच्छा होता,
शायद तू तेरी जवान पे
मेरी नाम ना लेता तो अच्छा होता,
शायद मुझे यूं सबसे खास
अनुभव ना किया होता
तो अच्छा होता,
शायद तू मेरे जीवन में
वापस ना आता तो अच्छा होता,
शायद तेरे लिए मेरी दिल
ना धड़के तो अच्छा होता।
पर क्या करे
सब कुछ यूं शायद में ही रह गया,
तू मेरी दीवाना
और में तेरी दीवानी बन गई
पर शायद ऐसे ना होता तो अच्छा होता।
यूं वक़्त के चलते हमें
यूं तकलीफ ना मिलती।
शायद हम ना मिलते तो अच्छा था,
शायद यूं शायद का
सब शायद ना रहता।

