Rita Chauhan
Abstract Others
संबंध थोड़ा विचित्र है
आस्था हनुमान सी
व श्री राम सा चरित्र है।
बात हो श्री कृष्ण और
अर्जुन की तो
मन को महका देने
वाला इत्र है।
जो लहू से अपना ना
होकर भी सबसे ज़्यादा
अपना सा लगे,
वही सच्चा मित्र है।
ज़िन्दगी
गुरु
क्योंकि कृष्ण...
काश !!
सच्चा मित्र
शिक्षक दिवस प...
हिंदी दिवस
आत्म - मंथन
प्रकृति, मनुष...
क्यूँ करे तलाश मितवा कोई जब खुद चाँद-तारे ही बहलाते हों दिल ! क्यूँ करे तलाश मितवा कोई जब खुद चाँद-तारे ही बहलाते हों दिल !
जिसमे खोये हुये थे और खोये हुये हैं। जिसमे खोये हुये थे और खोये हुये हैं।
किन-किन का डर उसे जहरीले नाग की तरह डंक मारता रहेगा किन-किन का डर उसे जहरीले नाग की तरह डंक मारता रहेगा
हमारे जीवन के आईने को धुंधला पड़ने से, खो नहीं जाने देते उसे अन्धकार में। हमारे जीवन के आईने को धुंधला पड़ने से, खो नहीं जाने देते उसे अन्धकार में।
रूखी सूखी खा लेते थे कर लेते थे दिनभर काम। रोजगार सब बन्द हो गए मंदे पड़ गये सारे क रूखी सूखी खा लेते थे कर लेते थे दिनभर काम। रोजगार सब बन्द हो गए मंदे प...
शुद्धता तुम भूल गए बार-बार संकेत दिया फिर भी ना संभले तुम। शुद्धता तुम भूल गए बार-बार संकेत दिया फिर भी ना संभले तुम।
वो पानी पीकर अपनी भूख मिटा गया दो पैसे कमाकर भी वो भूखा सो गया ! वो पानी पीकर अपनी भूख मिटा गया दो पैसे कमाकर भी वो भूखा सो गया !
अपने आप में ही सिसक रही हैं संवेदनाओं के नये आयाम गढ़ रही हैं। अपने आप में ही सिसक रही हैं संवेदनाओं के नये आयाम गढ़ रही हैं।
तो जाते जाते इतना तो बतालती जाओ... कि और कब तक तुम्हारे दिए गए इन जख्मों को ऐसे हीं तो जाते जाते इतना तो बतालती जाओ... कि और कब तक तुम्हारे दिए गए इन जख्मों ...
मिट जाए परेशानी व मायूसी के लेखे, आओं हम सब मिलकर सपने देखें। मिट जाए परेशानी व मायूसी के लेखे, आओं हम सब मिलकर सपने देखें।
वहीं ममता भरी परवाह से बनी मैं माँ हूं। वहीं ममता भरी परवाह से बनी मैं माँ हूं।
गमगीन इंसान की जिंदगी में, खुशियों के सागर भर देती हूं। गमगीन इंसान की जिंदगी में, खुशियों के सागर भर देती हूं।
मंजिल है अभी आधी अधूरी जरा चलने की कोशिश तो करो पूरी।। मंजिल है अभी आधी अधूरी जरा चलने की कोशिश तो करो पूरी।।
मैंने कभी किसी को मरने के लिये बोला नहीं, पता नहीं मुझे इसका ख्याल कैसे आ रहा है। मैंने कभी किसी को मरने के लिये बोला नहीं, पता नहीं मुझे इसका ख्याल कैसे आ रहा...
सुन पाता वही अहसास होते जागे जागे से जिनके। सुन पाता वही अहसास होते जागे जागे से जिनके।
साँसों की बोलियां, कूवत है तो आँसू पीजिए साँसें खरीद कर जी लीजिए। साँसों की बोलियां, कूवत है तो आँसू पीजिए साँसें खरीद कर जी लीजिए।
मुरझाई सी बैठी अब तो सतरंगी सपनों से भी डरती है ! मुरझाई सी बैठी अब तो सतरंगी सपनों से भी डरती है !
समंदर की असीम गहराइयों में समा जाने को जैसे कोई बेकरार प्रेमी समंदर की असीम गहराइयों में समा जाने को जैसे कोई बेकरार प्रेमी
शराफ़त की मूर्तियों को हमने शरारत करते देखा है शराफ़त की मूर्तियों को हमने शरारत करते देखा है
सर्व प्राणी समभाव का भी थोड़ा सा विस्तार कीजिए। मैं सिर्फ एहसास हूँ ये गाँठ बाँध लीजि सर्व प्राणी समभाव का भी थोड़ा सा विस्तार कीजिए। मैं सिर्फ एहसास हूँ ये ग...