"सब्र कर"
"सब्र कर"
तू सब्र कर, मिलेगा रबतू सब्र कर, मिलेगा नभ
सब्र के साथ, मेहनत कर
पायेगा तू सफल मंजर
प्रभु का तू शुक्र कर
मनु तन का दिया वर
कर्म के साथ, धैर्य धर
मंजिल पायेगा तू नर
सदैव तू अपने भीतर
अटूट सब्र का बांध भर
मिलेगा जरूर साहिल घर
सब्र पतवार चला निरंतर
सब्र रखता है, जीवन भर
वो बनता है, जरूर निर्झर
जो न रखते है, सब्र भीतर
पिंजरे में रोते है, वो नर
सब्र में है, ऐसा असर
मोम कर देता है, पत्थर
विष बना देता है, सुधाकर
जो सब्र पीते है, दरिया भर
जो बनता है, सब्र शजर
वो पाते फल-फूल सुंदर
चाहे कितनी हो भू बंजर
रखा सब्र खिलेंगे, तरुवर
तू सब्र कर, मिलेगा रब
तू सब्र कर, मिलेगा नभ
मिलेगा हर मुकाम सुंदर
सब्र के साथ चल निरंतर
जीतता वो व्यक्ति हर समर
सब्र शस्त्र रखता जो पुरंदर
वो ही बनता है, अजर-अमर
सब्र से जो बने भीतर निडर
सब्र शांत करे, हर लहर
सब्र से मिलते, हरि-हर
जो रखते है, सब्र भीतर
मजबूत होता है, जिगर
सब्र से कर साखी बशर
जिंदा होगा पत्थर शहर
खुशनुमा होगी हर नजर
मिलेगी तुझे सही डगर
तू सब्र कर, पायेगा रब
तू सब्र कर, पायेगा नभ
सब्र से जीवन जाते, संवर
सब्र से मीठे होते समंदर
