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अन्वेषा भाविका

Tragedy Fantasy Inspirational

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अन्वेषा भाविका

Tragedy Fantasy Inspirational

सब ख़त्म हो गया

सब ख़त्म हो गया

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कुछ पाने की चाह में,
सब कुछ मैंने खो दिया।
बचा था जो थोड़ा कुछ,
वो सब ख़त्म हो गया।

दो घड़ी की खुशी ने मुझे,
जीवन भर का ग़म दिया।
भर रहा था जो घाव ,
उसे फिर से हरा किया।

मुझे मेरी मजबूरी ने,
उस मोड़ पर लाकर खड़ा किया।
जिन अपनों पर विश्वास था,
उन अपनों ने ही दगा किया।

शुक्र है बस ईश्वर का,
ईश्वर ने मुझे बचा लिया।
जो चेहरा तुमने छिपा रखा था,
वक्त ने वो दिखा दिया।

सबक तो मैं सीख गई,
पर  मान अपना गंँवा दिया।
उम्मीद की जो डोर बाँधी,
परिस्थितियों ने उसे तोड़ दिया।

कुछ पाने की चाह में,
सब कुछ... मैंने खो दिया।
बचा था जो थोड़ा कुछ,
वो सब... ख़त्म हो गया।


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