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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

सब बिखर गया

सब बिखर गया

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पूरा संसार न जाने किस शोर में डूब गया,

गम की आंधी आई और सब बिखर गया,

बिलख-बिलख रोई अंत में सब हार गई,

सुध बुध खोकर अंत को ही स्वीकार गई,


जो बातें करनी थी सब वो मन में रह गई,

पूरा संसार न जाने किस शोर में डूब गया,

गम की आंधी आई और सब बिखर गया!

जो जख्म मिला उसका नहीं कोई हिसाब,


ना जाने इस जख्म का कौन देगा जवाब,

अपने छोड़ गए और सपने सारे उजड़ गए,

इतनी भीड़ में भी एकाकीपन ने डेरा डाला,

उनके जाने पर मन में आज विषाद बहुत है ,


रह रहकर उनकी आती आज याद बहुत है,

पूरा संसार न जाने किस शोर में डूब गया,

गम की आंधी आई और सब बिखर गया!

देखकर इतनी पीड़ा कितना वह घबरा गई,


आज नियति के हाथों कितनी मजबूर हुई,

सुंदर ख्वाबों के सतरंगी रंग चुने थे उसने,

एक पल में वो ख्वाब जाने कब छूट गया

जीवन का रूखापन अंतर को खलता है,


पूरा संसार न जाने किस शोर में डूब गया,

गम की आंधी आई और सब बिखर गया !


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